राहुल और केजरीवाल के बीच तकरार
चुनाव प्रचार के दौरान कई मौकों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी आमने-सामने आए हैं। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जाति जनगणना के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला किया। इसके जवाब में, केजरीवाल ने भी राहुल गांधी की आलोचना का प्रतिकार किया। इसी क्रम में, कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं जैसे कि राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा भी इस प्रतिवाद का हिस्सा हैं।
आम आदमी पार्टी की चिंता का कारण
दिल्ली में 70 सीटों में से लगभग 10 सीटें ऐसी हैं, जहां आम आदमी पार्टी को कांग्रेस से खतरे की आशंका है। इनमें ओखला, चांदनी चौक और बादली जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। ओखला से कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ अहमद खान की बेटी अरीबा खान, चांदनी चौक से जेपी अग्रवाल के बेटे मुदित अग्रवाल और बादली से कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।
इस स्थिति के चलते आम आदमी पार्टी के नेता चिंतित हैं कि कांग्रेस का बढ़ता वोट शेयर बीजेपी को मजबूत कर सकता है।
एक वरिष्ठ नेता ने इस बात को स्वीकार किया कि उनका मुख्य डर यह नहीं है कि कांग्रेस कितनी सीटें जीतेगी, बल्कि यह कि उसकी सफलता से बीजेपी को फायदा पहुंच सकता है। पार्टी के सूत्रों ने 2017 के एमसीडी चुनावों का उल्लेख किया, जिसमें आम आदमी पार्टी को 2015 के विधानसभा चुनाव में 54% और 2020 में 26% वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस ने 10% से 21% की छलांग लगाई। उस दौरान भले ही बीजेपी का वोट शेयर सिर्फ 4% बढ़ा हो, लेकिन उसने चुनाव में जीत हासिल की।
आम आदमी पार्टी के लिए चुनौतियाँ
इस बार आम आदमी पार्टी का चुनावी मुकाबला 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों की तुलना में अधिक कठिन लगता है। पार्टी का मानना है कि 50 से अधिक सीटें जीतना उन्हें अच्छी स्थिति में रखेगा, जबकि इससे कम सीटें मिलने पर नेतृत्व की परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। पिछले कुछ महीनों में पार्टी में कई नेता, जैसे कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह, कथित आबकारी घोटाले के चलते जेल जा चुके हैं, जबकि कई विधायक भी पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं।
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