इसके अलावा, 91 वर्षीय पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और उनकी 89 वर्षीय पत्नी तरला जोशी ने भी इस विशेष सुविधा का उपयोग किया और घर पर ही अपनी वोटिंग प्रक्रिया पूरी की। चुनाव आयोग ने 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले मतदाताओं के लिए 'वोट फ्रॉम होम' की सुविधा शुरू की है। इसका उद्देश्य उन मतदाताओं को मतदान में भाग लेने का अवसर प्रदान करना है, जिन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है, या जो शारीरिक रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं।
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए चुनाव आयोग की टीम पहले संबंधित मतदाता से संपर्क करती है और एक निर्धारित समय पर मतदान कर्मचारियों की टीम उनके घर पहुंचकर अस्थायी मतदान केंद्र स्थापित करती है। इस प्रक्रिया के दौरान, मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है। दिल्ली में पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान भी यह सुविधा काफी प्रभावी रही थी, जहां 85 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 4,774 मतदाताओं ने घर से मतदान किया। विशेष रूप से पश्चिम दिल्ली, नई दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं ने इस सुविधा का उपयोग किया।
चुनाव आयोग की यह पहल न केवल बुजुर्गों और दिव्यांगों को मतदान प्रक्रिया में शामिल करने का एक सशक्त तरीका है, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती में भी योगदान दे रही है। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक को अपनी वोटिंग का अधिकार मिले, चाहे उनकी शारीरिक स्थिति कुछ भी हो।
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