1 फरवरी तक के ट्रैकर के मुताबिक, 43.9 फीसदी लोग मानते हैं कि मौजूदा सरकार का कामकाज ठीक नहीं रहा है और वे बदलाव चाहते हैं। वहीं, 10.9 फीसदी लोग ऐसे हैं जो सरकार के कामकाज से नाराज तो हैं, लेकिन वे सरकार को बदलने के पक्ष में नहीं हैं। जबकि 38.3 फीसदी लोग ऐसे हैं जो सरकार से संतुष्ट हैं और बदलाव की आवश्यकता नहीं समझते।
आम आदमी पार्टी के लिए यह चिंता की बात हो सकती है कि सी वोटर के ट्रैकर के अनुसार, 38.3 फीसदी लोग पार्टी के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं, जो उसकी चुनावी रणनीति के लिए एक बड़ा चुनौती हो सकता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं, और यह चाहती हैं कि इस असंतुष्ट वर्ग को अपने पक्ष में किया जाए।
एक महीने में बदलाव
C वोटर ने पिछले एक महीने में दिल्ली के मतदाताओं के मनोबल को समझने के लिए ट्रैकर का इस्तेमाल किया, और यह देखा कि पिछले एक महीने में लोगों की राय में कुछ बदलाव आया है। 6 जनवरी को जब C वोटर ने अपना पहला ट्रैकर जारी किया था, तो 46.2 फीसदी लोगों ने कहा था कि वे मौजूदा सरकार से नाराज हैं और बदलाव चाहते हैं। वहीं, 2.7 फीसदी लोगों ने कहा था कि वे नाराज तो हैं, लेकिन सरकार को एक और मौका देना चाहते हैं। इसके अलावा, 46.9 फीसदी लोगों ने यह कहा था कि वे सरकार से संतुष्ट हैं और बदलाव की आवश्यकता नहीं समझते। अब एक महीने बाद, इस ट्रैकर में यह देखा गया कि नाराज और बदलाव चाहने वाले लोगों की संख्या में कुछ गिरावट आई है, जबकि नाराज होते हुए भी बदलाव नहीं चाहने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। साथ ही, बदलाव नहीं चाहने वाले लोगों की संख्या में भी कमी आई है, जो यह दर्शाता है कि मतदाताओं के विचारों में कुछ हलचल हुई है और उनकी राय में थोड़ी सी लचीलापन आया है।
यह बदलाव चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि राजनीतिक पार्टियां इस बदलाव को समझकर अपनी रणनीति को नया दिशा देने की कोशिश करेंगी। दिल्ली की जनता की सोच में यह बदलाव यह भी संकेत देता है कि चुनाव के आखिरी दिनों में मतदाता किसके पक्ष में फैसला लेंगे, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं है।
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