अमित शाह का यह कार्यक्रम करीब 30 लाख की आबादी और 20 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि चुनाव में रणनीतिक रूप से जीत हासिल की जा सके। गृहमंत्री 11 जनवरी को दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों के नेताओं से मुलाकात करेंगे, और इस दौरान वह दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्थित लगभग 3,000 झुग्गी कॉलोनियों के प्रमुखों से संवाद करेंगे। इस बैठक का आयोजन जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में किया जाएगा, और भाजपा का मुख्य उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ियों के वोटरों को अपनी ओर लाना है, जो पहले आम तौर पर 'आप' के समर्थक रहे हैं।
भाे़जपा ने झुग्गी-झोपड़ियों में 'आप' के इस बड़े वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए कई दांव-पेंच खेले हैं।
पिछले कुछ महीनों से दिल्ली के भाजपा सांसद, विधायक और अन्य नेता झुग्गियों में जाकर रात बिताते हैं, ताकि वहां के लोगों के मुद्दों को सुन सकें और उन्हें यह विश्वास दिला सकें कि अगर भाजपा सरकार बनाती है, तो उनके सभी मुद्दों का समाधान किया जाएगा। भाजपा नेता इन लोगों से सीधे जुड़ने के लिए रातों रात झुग्गी-झोपड़ी में रुकते हैं और समस्याओं को समझने के बाद चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने का वादा करते हैं। 'जहां झुग्गी, वहां मकान' का नारा भी जोर-शोर से प्रचारित किया जा रहा है, ताकि यह मतदाताओं के दिलों में घर कर सके।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के अशोक विहार इलाके में 1675 फ्लैट्स झुग्गीवासियों को सौंपे थे और उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से यह अपील की थी कि वे घर-घर जाकर सभी झुग्गीवासियों को बताएं कि भाजपा के सत्ता में आने पर उन्हें भी पक्के मकान दिए जाएंगे।
दिल्ली में करीब 675 झुग्गी कल्स्टर स्थित हैं, जिनमें से लगभग 18-20 प्रतिशत झुग्गी-झोपड़ियां पूर्वी और उत्तर-पूर्वी लोकसभा क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इन झुग्गियों में निवास करने वाले लोगों का वोट चुनावों में निर्णायक साबित हो सकता है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में, झुग्गी-झोपड़ियों के वोटरों ने खुलकर 'आप' का समर्थन किया था, जो पार्टी के लिए बड़ी जीत का कारण बना। हालांकि भाजपा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने इन झुग्गीवासियों से झूठे वादे किए हैं और उनके जीवन में पिछले 10 सालों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
दिल्ली की झुग्गियों में लगभग 30 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से लगभग आधे मतदाता हैं। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, 2020 के विधानसभा चुनाव में लगभग 61 प्रतिशत झुग्गीवासी वोटरों ने 'आप' का समर्थन किया था, जिसकी बदौलत पार्टी ने 70 में से 67 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। अब भाजपा का लक्ष्य इस समर्थन को तोड़ने का है।
जिन सीटों पर झुग्गी-झोपड़ियां अधिक हैं, उनमें विशेष रूप से नरेला, वजीरपुर, आदर्शनगर, राजेंद्र नगर, मॉडल टाउन, बदरपुर, संगम विहार, अंबेडकर नगर, तुगलकाबाद, सीमापुरी, त्रिलोकपुरी, कालकाजी, कोंडली, ओखला, मोतीनगर, मादीपुर, शालीमार बाग, किराड़ी और मटियामहल जैसी सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर झुग्गी-झोपड़ियों के वोटरों का प्रभाव चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित कर सकता है।
भाे़जपा का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने झुग्गीवासियों से जो वादे किए थे, उनमें से अधिकांश अधूरे रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि 'आप' ने इन्हें सिर्फ चुनावी रोटियां सेंकने के लिए इस्तेमाल किया और उनके जीवन में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
भाजपा यह भी दावा करती है कि पिछले 10 वर्षों में झुग्गीवासियों के जीवन स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है, जबकि भाजपा अपनी सरकार में इन लोगों के लिए बड़े बदलाव करने का वादा कर रही है।
अब देखना यह है कि झुग्गीवासियों का समर्थन किस पार्टी के पक्ष में जाता है और यह चुनावी रणनीति किस हद तक भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होती है।
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