लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के जगला गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने इस साल की शुरुआत में बीमारी के प्रकोप के कारण जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे "पूरी तरह से सरकारी विफलता" करार दिया और संसद में इस मुद्दे को उठाने की घोषणा की।
राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार आदिवासियों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण के कारण हुई है। उन्होंने कहा, "आप 24 घंटे विकास की बात करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार भी 24 घंटे चलता है। जब हमारे आदिवासी भाई-बहनों को आपकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब सरकार गायब हो जाती है।" उन्होंने कहा कि वह केवल बालाघाट ही नहीं, बल्कि देश भर के आदिवासियों पर हो रहे अन्याय को संसद में उठाएंगे।
भाजपा का पलटवार: इसे बताया 'राजनीतिक पर्यटन' राहुल गांधी के इस दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इसे "राजनीतिक पर्यटन" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सरकार बनाने की लालसा में घटना के महीनों बाद बालाघाट पहुंच रहे हैं और इस त्रासदी का राजनीतिक लाभ उठा रहे हैं। शुक्ला ने दावा किया कि घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव, खुद वे और जिले के प्रभारी मंत्री ने क्षेत्र का दौरा किया था। सरकार ने इलाके में चार ब्लॉक महिला विकास अधिकारियों को तैनात किया है और 14 उप-स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अगस्त महीने में चार दूरदराज के बैगा-बहुमूल्य गांवों में बीमारी से 8 बच्चों की मौत हुई थी और करीब 100 अन्य बीमार पड़े थे। हालांकि, स्थानीय कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का दावा है कि मरने वालों का आंकड़ा 30 तक हो सकता है। 1 से 13 वर्ष की आयु के इन बच्चों में तेज बुखार, चकत्ते, पेट दर्द और छालों जैसे लक्षण देखे गए थे। मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए रक्त के नमूने कोलकाता और पुणे स्थित आईसीएमआर (ICMR) प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे।





