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राष्ट्रीय • दिल्ली

13 करोड़ नाम हटने के बाद चुनाव आयोग का बड़ा कदम: छूटे हुए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान का आदेश

मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम कटने के बाद चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। छूटे हुए वोटर्स के लिए विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।

13 करोड़ नाम हटने के बाद चुनाव आयोग का बड़ा कदम: छूटे हुए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान का आदेश
फोटो: Election Commission voter drive, Form 6 voter enrollment, SIR exercise deletion, Chief Electoral Officer update, Maharashtra voter verification

देशभर में विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से भारी संख्या में 13 करोड़ नाम हटाए जाने पर मचे बवाल के बाद, भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, जहां यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, "छूटे हुए" मतदाताओं को फिर से नामांकित करने के लिए एक "विशेष अभियान" चलाने का निर्देश दिया है।

यह निर्देश 29 सितंबर को लिखित रूप में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भेजा गया और गुरुवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इसे दोहराया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब आयोग को 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट रोल से 13 करोड़ नाम हटाए जाने को लेकर कड़ी जांच और आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

फॉर्म 6 के जरिए होगी वापसी ईसीआई के निर्देश के अनुसार, जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEOs) और EROs मिलकर छूटे हुए और नए/पहली बार के योग्य मतदाताओं के नामांकन के लिए अभियान चलाएंगे। यह अभियान उस 'फॉर्म 6' के जरिए चलाया जाएगा, जिसमें से जुलाई में जोड़े गए उस विवादास्पद सवाल को हटा दिया गया है, जिस पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। ऑनलाइन फॉर्म में यह पूछा जाने लगा था कि क्या आवेदक या उनके माता-पिता SIR के बाद की मतदाता सूची में हैं या नहीं। अब फॉर्म को केवल वैधानिक नियमों के दायरे में रखा गया है।

महाराष्ट्र में जल्दबाजी में नाम न काटने के निर्देश गुरुवार को हुई बैठक के बाद, महाराष्ट्र में (जहां SIR अभी जारी है) अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मतदाता का नाम जल्दबाजी में न काटा जाए। मुंबई शहर और मुंबई उपनगरीय के अधिकारियों को भेजे गए एक नोट में कहा गया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए और हटाने से पहले पूरी जांच और सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को "अनमैप्ड" या "तार्किक विसंगतियों" के लिए नोटिस भेजे गए हैं, उन्हें अब व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए आने की जरूरत नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और ईआरओ (ERO) अंतिम निर्णय लेंगे। आयोग के इस कदम का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।