‘मिशन बिहार’ के बाद मोदी रथ तमिलनाडु फतह अभियान को तैयार

जब बिहार में पिछले कुछ घंटों की नाटकीय घटनाओं पर चर्चा करने में पूरा देश व्यस्त है, इस बीच इस पर भी जरा ध्यान दे दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को क्या कर रहे हैं? वह रामेश्वरम में कई अन्य कार्यक्रमों के साथ-साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराकर और अयोध्या और रामेश्वरम के बीच एक ट्रेन को झंडी दिखाकर एपीजे अब्दुल कलाम के स्मारक का उद्घाटन करने पहुंचे हैं. अब अगला बड़ा राजनीतिक एक्शन तमिलनाडु की राजनीति में होगा. एक ऐसा राज्य, जहां गैर द्रविड़ पार्टियां अभी तक अकेले अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम नहीं हो पाई है. बीजेपी दशकों के लगातार कोशिश के बावजूद वहां की राजनीति में कोई महत्वपूर्ण हस्तक्षेप नहीं कर पाई है. पिछली बार के चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था, उसके खुद के स्टैंडर्ड से काफी नीचे. AIADMK(अन्नाद्रमुक) में दरार से बीजेपी को फायदा तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मृत्यु के बाद बीजेपी को राजनीति में ओपनिंग मिलती दिख रही है. AIADMK दो गुटों में बंट चुकी है- एक गुट मुख्यमंत्री ई पलनीस्वामी और दूसरा गुट हटाए गए सीएम ओ पनीरसेल्वम के नेतृत्व में है. दोनों बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं जैसा कि राष्ट्रपति के चुनावों के दौरान देखने को मिला. साफ है कि 2019 की लोकसभा चुनाव में एक गुट बीजेपी के साथ गठबंधन बना लेगा. हां, ये बहुत साफ नहीं है कि दोनों में से कौन ऐसा करेगा. हालांकि बीजेपी, AIADMK के गुटों को किसी तरह मिलाने की कोशिश कर रही है, ताकि उनके पास एक अच्छी पूरी पार्टी मशीनरी उपलब्ध हो. बीजेपी के महासचिव मुरलीधर राव इस योजना को अंजाम देने के लिए समय के साथ काम कर रहे हैं. बीजेपी उम्मीद कर रही है कि कम से कम एक गुट इसमें शामिल हो जाए, ताकी डीएमके-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ मजबूत विकल्प पेश किया जा सके. रजनीकांत का अगला कदम महत्वपूर्ण होने जा रहा है गेम प्लान का दूसरा हिस्सा है रजनीकांत फैक्टर. रजनीकांत ने एक पार्टी शुरू करने के लिए पर्याप्त संकेत दे दिए हैं. रजनीकांत के प्रधानमंत्री के करीबी होने के कारण उनकी 'बनने वाली पार्टी' की बीजेपी के साथ गठबंधन की उम्मीद की जा सकती है. इससे भगवा पार्टी को प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त मिलता प्रतीत होता है. इस सुपरस्टार का राजनीति में शामिल होने पर विचार करने के पीछे जयललिता की गैरमौजूदगी ही एकमात्र कारण नहीं है. जानकारों का कहना है कि हो सकता है बीजेपी ने ही रजनीकांत के विचार को पंख दिए हों. बीजेपी के नेताओं का मानना है कि मोदी प्रीमियम की वजह से पार्टी को देश के हर कोने में एक अच्छी शुरुआत तो मिल ही जाती है. शुरुआत को वोट में कैसे तब्दील किया जाए, इसके लिए पार्टी मशीनरी की जरूरत होती है. गठबंधन द्रविड़ क्षेत्रीय गठबंधन तैयार करना एकमात्र तरीका है, जिससे यहां बड़े फायदे की उम्मीद की जा सकती है. AIADMK का एक गुट रजनीकांत की बनने वाली पार्टी और बीजेपी से मिलकर बना एक ट्रायंगल तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में जीतने की क्षमता रखता है. वन्नियार जाति में बेस वाली पीएमके ने 2014 के चुनावों में बीजेपी के साथ हिस्सा लिया था. ये तालमेल भी जारी रहेगा, इसकी पूरी संभावना है. कलाम स्मारक में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा को निहारते पीएम मोदी मोदी-शाह के मिशन में सुस्ताने की जगह नहीं तमिलनाडु की योजना चल रही है. इसलिए इसी तरह के सियासी तमाशे और कुछ राजनीतिक इनोवेशन देखने के लिए तैयार रहें. अचानक और अच्छी तरह से लिखी गई स्क्रिप्ट सही समय पर बाहर आएगी. बिहार के बारे में पर्याप्त संकेत थे और हम बहस कर रहे थे कि हां यह संभव है कि नीतीश कुमार एनडीए में शामिल होने का विकल्प साथ रख रहे हों. लेकिन जिस दिन नए राष्ट्रपति ने शपथ ली, उसके अगले दिन ही अगले काम में जुट गए. बिहार और तमिलनाडु के अलावा बंगाल भी बीजेपी के लिए इसी कड़ी में आता है- अपने विस्तार का मौका पार्टी नहीं छोड़ना चाहती है. बंगाल की योजना भी पहले ही शुरू हो चुकी है, जहां राजनीतिक और सामाजिक तापमान बढ़ रहा है. ये अनुमान लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों को भी प्रवर्तन एजेंसियों की गर्मी का सामना करना होगा, जिस तरह लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों का सामना हो रहा है. बीजेपी के लिए संभावित लाभ क्या हो सकता है, ये बहस का विषय हो सकता है. मोदी-शाह की जोड़ी की डिक्शनरी में 'विराम' शब्द नहीं है. टीम मोदी देश के हर उस हिस्से को अपने साथ जोड़ने की मुहिम में जुटी है, जहां फिलहाल उसका वर्चस्व नहीं है.