निजी स्कूलों पर नहीं चलता सरकार का वश

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के टॉयलेट में एक बच्चे की गला रेतकर हत्या ने एक बार फिर कथित अभिजात्य शिक्षण संस्थानों के इस दावे की पोल खोल दी कि वे शिक्षण और बच्चों की देखरेख के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हैं। इन दावों के आकर्षण में ही अभिभावक तमाम जलालत और शोषण ङोलकर अपने बच्चों को ऐसे शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाते हैं। मधुबनी मूल के जिस परिवार ने स्कूल की कुव्यवस्था के चलते अपना मासूम बच्चा खो दिया, उसके प्रति पूरे देश की सहानुभूति है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बच्चे के परिवारजनों से बात करके उन्हें धैर्य रखने की नसीहत दी, साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री से बात करके हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के घेरे में लाने का आग्रह किया है। अच्छा होगा कि गुरुग्राम हादसे से सबक लेकर बिहार सरकार भी सूबे के सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के इंतजाम की गहन समीक्षा करवाए तथा इसे फूलप्रूफ बनाने के लिए स्कूल संचालकों को बाध्य करे। स्कूल बच्चों के लिए सर्वाधिक मुफीद स्थान माने जाते हैं। अभिभावक अपने पांच-सात साल के बच्चे को स्कूल के अलावा किसी दूसरी जगह अकेला नहीं छोड़ सकते। दुर्भाग्य है कि रेयान हादसे ने अभिभावकों के इस भरोसे को खंडित कर दिया। दरअसल, चमाचम इमारत और फर्नीचर की आड़ में अंतरराष्ट्रीय मानकों की पूर्ति का दावा करने वाले शिक्षण संस्थान शिक्षा की व्यावसायिक दुकानें भर हैं जहां अपने बच्चों को श्रेष्ठतम शिक्षा दिलाने के आग्रही अभिभावकों का तरह-तरह से शोषण किया जाता है। सच्चाई यह है कि इन स्कूलों के चकाचौंध माहौल में न तो शिक्षा का स्तर अपेक्षानुसार होता है और न बच्चों की देखरेख। रेयान हादसा इसका उदाहरण है। स्कूल प्रबंधन बच्चों की देखरेख के प्रति जरा भी संवेदनशील होता तो स्कूल परिसर में बच्चे का गला रेतकर हत्या जैसा अपराध संभव नहीं था। पुलिस ने इस जघन्य वारदात को अंजाम देने वाले बस कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है यद्यपि उसकी जुर्म स्वीकारोक्ति से स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती। पीड़ित परिवार बिहार के मधुबनी मूल का है लिहाजा राज्य सरकार की भी जिम्मेदारी है कि सभी दोषियों पर कार्रवाई के लिए हरियाणा सरकार पर दबाव कायम रखे।